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गोंडवाना विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती में स्थानीय पात्र अभ्यर्थियों को मिले न्यायसंगत अवसर: सीनेट सदस्य दिलीप चौधरी

गड़चिरोली। गोंडवाना विश्वविद्यालय, गड़चिरोली में Employment Notice No. GUG/66/2026 दिनांक 16 अप्रैल 2026 के तहत जारी एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय, पात्र, अनुभवी एवं शोध कार्य से जुड़े अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर दिए जाने की मांग विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य दिलीप चौधरी ने कुलपति को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से की है।
ज्ञापन में दिलीप चौधरी ने कहा है कि गोंडवाना विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत अनेक स्थानीय प्राध्यापकों ने पाठ्यक्रम निर्माण, प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रश्नपत्रों के मॉडरेशन, परीक्षा संबंधी कार्यों, अध्ययन मंडलों की जिम्मेदारियों, शैक्षणिक योजना निर्माण तथा विभिन्न समितियों में सक्रिय भूमिका निभाकर विश्वविद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे शिक्षकों के अनुभव, शोध कार्य और विश्वविद्यालय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछली शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में बाहरी विश्वविद्यालयों एवं अन्य जिलों के अभ्यर्थियों का चयन हुआ था, जिसके कारण स्थानीय पात्र एवं अनुभवी प्राध्यापकों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल सके। इससे विश्वविद्यालय के निर्माण और विकास में लगातार योगदान देने वाले स्थानीय शिक्षकों में निराशा का वातावरण बना तथा स्थानीय शैक्षणिक नेतृत्व के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
दिलीप चौधरी ने कहा कि गोंडवाना विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य गड़चिरोली, चंद्रपुर तथा आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसलिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्थानीय पात्र अभ्यर्थियों के अध्यापन अनुभव, शोध कार्य, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों में योगदान तथा संस्थान के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, गुणवत्तापरक और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कर स्थानीय पात्र, अनुभवी एवं योग्य अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर प्रदान किए जाएं। उनका विश्वास है कि इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध संस्कृति, संस्थागत निरंतरता तथा स्थानीय शैक्षणिक नेतृत्व को और अधिक मजबूती मिलेगी।