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स्वराज्य स्वाभिमानी संघटना ने चंद्रपुर हाईवे पर भरे प्राणघातक गड्ढे, संभावित दुर्घटनाओं को टाला

मुल | संवाददाता मुल-चंद्रपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहली ही बारिश के बाद बने बड़े-बड़े गड्ढों से वाहन चालकों को हो रही परेशानी और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए सामाजिक संस्था स्वराज्य स्वाभिमानी संघटना, मुल ने पहल करते हुए गड्ढों को सीमेंट-कंक्रीट से भरने का कार्य किया। संस्था के इस सामाजिक उपक्रम की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, मुल-चंद्रपुर मार्ग पर डोनी फाटा परिसर में बारिश के कारण कई स्थानों पर गहरे और प्राणघातक गड्ढे बन गए थे। इन गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वराज्य स्वाभिमानी संघटना के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने स्वयं श्रमदान कर सीमेंट, गिट्टी और रेत की सहायता से गड्ढों को भरने का कार्य किया। कुछ गड्ढे इतने बड़े थे कि उन्हें भरने के लिए एक-एक बोरी सीमेंट का उपयोग करना पड़ा।

संस्था के इस प्रयास से मार्ग पर आवागमन करने वाले नागरिकों को काफी राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने संगठन के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के सामाजिक कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं।

इस अवसर पर नागरिकों ने मुल पुलिस स्टेशन के तत्कालीन थाना प्रभारी सुमित परतेकी को भी याद किया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में उन्होंने भी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मुल-चंद्रपुर मार्ग पर बने खतरनाक गड्ढों को भरने का अभियान चलाया था, जिससे अनेक संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कर्तव्य के साथ सामाजिक दायित्व निभाने वाले ऐसे अधिकारी और उनके कार्य हमेशा याद रखे जाते हैं।

नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण किया जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई स्थानों पर सड़कें उखड़ने लगती हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं। ऐसे गड्ढों की समय पर मरम्मत करना संबंधित विभाग और ठेकेदारों की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके, कई बार आवश्यक कार्रवाई में देरी होने से वाहन चालकों को जोखिम उठाना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़कों की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा बरसात के दौरान बनने वाले गड्ढों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।