चंद्रपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गोंडवाना विश्वविद्यालय की प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में जिला कलेक्टर वसुमना पंत ने नागरिकों से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
होटल तिरुपति क्राउन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पंत ने कहा कि प्लास्टिक का उपयोग भले ही सुविधाजनक माना जाता हो, लेकिन यह पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने नागरिकों से कपड़े के थैलों का उपयोग करने और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेने की अपील की। गोंडवाना विश्वविद्यालय की चंद्रपुर प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा “चंद्रपुर में प्रदूषण और नागरिकों की भूमिका” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को इस अवसर पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रशांत बोकारे ने की।
अपने संबोधन में डॉ. बोकारे ने प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि अधिक तापमान में प्लास्टिक के सूक्ष्म कण पानी में घुलकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने स्टील अथवा तांबे की बोतलों के उपयोग को बेहतर विकल्प बताया।
प्रख्यात पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ राजुरकर ने कहा कि प्रदूषण के कारण चंद्रपुर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि शहर में लगाए गए कृत्रिम फेफड़े मात्र दो दिनों में काले पड़ जाते हैं, जो वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने लोगों को योग और प्राणायाम अपनाने की सलाह भी दी।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और प्रभावी कचरा प्रबंधन जैसे उपायों पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा बड़ी संख्या में शिक्षाविद, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।










