चंद्रपुर, 30 जुलाई। ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर किसान कर्जमुक्ति योजना-2026’ के तहत गांव स्तर पर प्रकाशित सूची और योजना के पोर्टल पर दिखाई गई किसानों की बकाया राशि में यदि अंतर पाया जाता है, तो योजना के पोर्टल पर प्रदर्शित बकाया राशि को ही मान्य माना जाएगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के अनुसार, कर्जमाफी एवं वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) घटक के लिए राज्य की विभिन्न बैंकों ने योजना पोर्टल पर 31.17 लाख ऋण खातों की जानकारी उपलब्ध कराई थी। महा-आईटी द्वारा कंप्यूटर सत्यापन के बाद 25 जुलाई 2026 को 16.96 लाख ऋण खातों की सूची आधार प्रमाणीकरण के लिए जारी की गई। इनमें 7.03 लाख खाते जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों तथा 9.93 लाख खाते वाणिज्यिक बैंकों के शामिल हैं।
सरकार के संज्ञान में आया कि गांव स्तर पर प्रकाशित सूची में वाणिज्यिक बैंकों के एनपीए खाताधारक किसानों के नाम के सामने दर्शाई गई बकाया राशि और योजना पोर्टल पर दिखाई गई राशि में अंतर है। ऐसे मामलों में पोर्टल पर प्रदर्शित राशि ही अंतिम और मान्य होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर दिखाई जा रही बकाया राशि 31 मार्च 2026 तक की है। सभी बैंकों को 1 अप्रैल 2026 के बाद का ब्याज नहीं जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं और सभी बैंकों ने इसे लिखित रूप से स्वीकार किया है।
यदि किसान पोर्टल पर दिखाई गई राशि से सहमत हैं, तो वे आधार प्रमाणीकरण कर सकते हैं। सफल प्रमाणीकरण के बाद उन्हें रसीद प्राप्त होगी, जिसमें कर्जमाफी की राशि का विवरण होगा। इसके बाद पात्र राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के ऋण खाते में जमा की जाएगी और कर्जमुक्ति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
कर्जमाफी पूरी होने के बाद लाभार्थी किसानों की सूची संबंधित बैंक शाखाओं और सेवा सहकारी संस्थाओं में प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही पात्र किसानों को संबंधित बैंक द्वारा खरीफ फसल ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
यदि किसी किसान को पोर्टल पर दिखाई गई राशि या ऋण संबंधी अन्य जानकारी पर आपत्ति है, तो वह पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायतों का निपटारा जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। यह जानकारी राज्य के सहकार आयुक्त एवं निबंधक दीपक तावरे के पत्र के आधार पर जिला उपनिबंधक (सहकारी संस्था) जयसिंह ठाकुर ने दी है।




