चंद्रपुर। शहर में नाबालिगों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया। विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 65 नाबालिग वाहन चालकों को पकड़कर उनके वाहन जब्त कर लिए। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा गया तो संबंधित अभिभावकों के खिलाफ सीधे मामला दर्ज किया जाएगा और 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
सुबह 7 से 9 बजे तक चला विशेष अभियान
ट्रैफिक पुलिस निरीक्षक अमोल बारापात्रे के नेतृत्व में बुधवार सुबह 7 बजे से 9 बजे तक शहरभर में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान वाहन चलाते हुए मिले 65 नाबालिगों को हिरासत में लेकर उनके वाहन जब्त कर ट्रैफिक पुलिस कार्यालय लाया गया।
अभिभावकों को बुलाकर दी गई सख्त चेतावनी
कार्रवाई के बाद सभी नाबालिगों के अभिभावकों को शाम को यातायात कार्यालय बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि नाबालिगों को वाहन चलाने देना न केवल उनके बच्चों बल्कि अन्य लोगों की जान के लिए भी खतरा है और यह कानूनन गंभीर अपराध है।
चूंकि यह अभियान मुख्य रूप से जागरूकता के उद्देश्य से चलाया गया था, इसलिए पहली बार पकड़े गए सभी नाबालिग चालकों से 500 रुपये का जुर्माना वसूल कर उनके वाहन छोड़ दिए गए।
दोबारा गलती पर होगी सख्त कार्रवाई
यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए दोबारा पकड़ा जाता है तो संबंधित अभिभावकों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी और 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन ने साफ किया है कि आगे की कार्रवाई में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
दो साल बाद फिर शुरू हुई कार्रवाई
शहर में इस कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा है। दरअसल, करीब दो वर्ष पहले भी ट्रैफिक पुलिस ने नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने और अभिभावकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी, लेकिन उसके बाद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब दो साल बाद पुलिस की इस पहल ने एक बार फिर उम्मीद जगाई है। हालांकि, शहरवासियों के मन में सवाल भी उठ रहे हैं कि नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई और क्या यह अभियान लगातार जारी रहेगा या कुछ दिनों बाद फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
अभियान जारी रखने का दावा
यातायात विभाग का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात अनुशासन को मजबूत करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस प्रशासन अपने इस दावे पर कितना कायम रहता है।




