
6 माह में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 119 मामले दर्ज, 39.54 लाख रुपये का मादक पदार्थ जब्त
चंद्रपुर, 6 जुलाई। जिले में मादक पदार्थों की बिक्री, भंडारण और सेवन पर रोक लगाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा पिछले छह महीनों में एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) अधिनियम के तहत 119 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 158 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई तथा कुल 39 लाख 54 हजार 68 रुपये मूल्य का मादक पदार्थ एवं अन्य सामग्री जब्त की गई है।
पुलिस विभाग के अनुसार, गांजा रखने के 15 मामलों में 27 लोगों के खिलाफ, एमडी पाउडर रखने के 8 मामलों में 15 लोगों के खिलाफ तथा पॉपी स्ट्रॉ के एक मामले में 2 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किए गए हैं। वहीं, मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े 95 मामलों में 114 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मादक पदार्थों के उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक हाल ही में अतिरिक्त जिलाधिकारी डॉ. नितिन व्यवहारे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के अधीक्षक नितिन धार्मिक, स्थानीय अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक दीपक कांक्रेडवार, योगेश हिवसे, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त सुहास सावंत, उपशिक्षणाधिकारी गणेश येळणे तथा डाक विभाग के प्रशांत कन्नमवार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अतिरिक्त जिलाधिकारी डॉ. व्यवहारे ने कहा कि जिले को नशामुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि मादक पदार्थों से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी तुरंत पुलिस विभाग को दें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराने के लिए स्कूलों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। साथ ही जिले के रासायनिक उत्पाद बनाने वाले कारखानों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा उनके नाम, स्थापना वर्ष और उत्पादन संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाए। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
डॉ. व्यवहारे ने एमआईडीसी क्षेत्र में खाली पड़े स्थानों पर किसी प्रकार के अवैध उत्पादन की जांच करने तथा वन एवं कृषि विभाग को जिले में कहीं भी गांजा या खसखस की अवैध खेती न होने देने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए।




