My City Podcast में ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. पीयूष ड. गाडेगोने से खास बातचीत; मोबाइल, गलत एक्सरसाइज, बढ़ता वजन और बदलती जीवनशैली को लेकर दी महत्वपूर्ण जानकारी
चंद्रपुर। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधियों में कमी तथा बढ़ते वजन के कारण कम उम्र में ही कमर दर्द, गर्दन दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं लोगों में देखने को मिल रही हैं। आज की पीढ़ी में इन समस्याओं को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है।
इसी विषय को लेकर My City News के My City Podcast में चंद्रपुर के सुप्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. पीयूष ड. गाडेगोने के साथ विशेष बातचीत की गई। इस दौरान उन्होंने हड्डियों, जोड़ों और रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के साथ-साथ कमर एवं गर्दन के दर्द से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के विस्तार से जवाब दिए।
कम उम्र में क्यों बढ़ रही हड्डियों और जोड़ों की समस्या?
डॉ. गाडेगोने ने बताया कि आजकल हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं। युवाओं में भी कमर और गर्दन दर्द की शिकायतें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, मोबाइल को लगातार नीचे की ओर देखकर इस्तेमाल करना, कंप्यूटर पर घंटों काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, गलत पोस्चर और बढ़ता वजन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि दर्द को हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार या लगातार होने वाले दर्द के पीछे रीढ़ से संबंधित समस्या भी हो सकती है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
कैल्शियम और विटामिन-D की कमी पर भी दी जानकारी
पॉडकास्ट में शरीर में कैल्शियम और विटामिन-D की भूमिका पर भी चर्चा हुई। डॉ. गाडेगोने ने बताया कि मजबूत हड्डियों के लिए पर्याप्त पोषण के साथ शरीर में विटामिन-D का उचित स्तर भी महत्वपूर्ण है।
हड्डियों की कमजोरी, मांसपेशियों में कमजोरी या बार-बार होने वाली कुछ समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर कैल्शियम या विटामिन-D की कमी मान लेना उचित नहीं है। आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।
कमर दर्द कब सामान्य और कब गंभीर?
कमर दर्द आज एक आम समस्या बन गई है, लेकिन हर कमर दर्द को सामान्य मानना सही नहीं है। यदि दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार होता है या पैरों में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन अथवा कमजोरी जैसी समस्या के साथ दिखाई देता है तो विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक हो सकता है।
डॉ. गाडेगोने ने बताया कि कुछ विशेष लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द ऑर्थोपेडिक अथवा स्पाइन विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल रीढ़ के लिए चुनौती
आज के दौर में मोबाइल और कंप्यूटर जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनके लंबे समय तक गलत तरीके से इस्तेमाल से गर्दन और पीठ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विशेषकर लगातार गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने की आदत गर्दन की मांसपेशियों और पोस्चर पर असर डाल सकती है। लंबे समय तक कंप्यूटर पर बैठने वालों को भी बीच-बीच में ब्रेक लेना, सही पोस्चर बनाए रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना जरूरी है।
जिम में गलत एक्सरसाइज से हो सकता है नुकसान
फिटनेस को लेकर युवाओं में जिम का क्रेज तेजी से बढ़ा है। लेकिन डॉ. गाडेगोने ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक्सरसाइज सही तकनीक और उचित मार्गदर्शन के साथ करना जरूरी है।
बहुत अधिक वजन उठाना, गलत पोस्चर में एक्सरसाइज करना या अपनी क्षमता से अधिक वर्कआउट करना चोट का कारण बन सकता है। इसलिए जिम में ट्रेनिंग करते समय सही तकनीक और शरीर की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए।
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होती हैं हड्डियां?
पॉडकास्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर भी चर्चा हुई। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों का हड्डियों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
इस उम्र में हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए उचित पोषण, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
क्या रोज दूध पीना ही मजबूत हड्डियों की गारंटी है?
डॉ. गाडेगोने ने हड्डियों के स्वास्थ्य को केवल दूध पीने तक सीमित नहीं माना। मजबूत हड्डियों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-D, नियमित शारीरिक गतिविधि तथा स्वस्थ जीवनशैली का समग्र योगदान महत्वपूर्ण है।
यानी केवल दूध पीने से ही हड्डियां हमेशा मजबूत रहेंगी, ऐसा मानना सही नहीं है।
चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का कितना असर?
आजकल चाय, कॉफी और शीतल पेय का सेवन बड़ी संख्या में लोग करते हैं। पॉडकास्ट में इनके अत्यधिक सेवन और संतुलित आहार के महत्व पर भी चर्चा की गई।
डॉ. गाडेगोने ने लोगों को संतुलित खान-पान और अत्यधिक सेवन से बचने की सलाह दी। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को जिम्मेदार मानने के बजाय पूरी डाइट और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।
दर्द होने पर खुद से Pain Killer लेना कितना सुरक्षित?
दर्द होने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के स्वयं Pain Killer लेना शुरू कर देते हैं। इस आदत को लेकर भी पॉडकास्ट में सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
दर्द का कारण जाने बिना लंबे समय तक स्वयं दवाइयां लेना उचित नहीं है। लगातार दर्द होने की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेकर सही कारण और उचित उपचार की दिशा तय करना ज्यादा सुरक्षित है।
बढ़ता वजन घुटनों और कमर पर बढ़ा सकता है दबाव
वजन बढ़ना शरीर के मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम पर अतिरिक्त भार डाल सकता है। विशेषकर घुटनों और कमर पर इसका असर पड़ सकता है।
डॉ. गाडेगोने ने स्वस्थ वजन बनाए रखने, नियमित व्यायाम करने और सक्रिय जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कौन-सी एक्सरसाइज?
हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यायाम का चयन किया जाना चाहिए।
चलना, उचित स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और शरीर को सक्रिय रखने वाली गतिविधियां सामान्य रूप से उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, पहले से कोई बीमारी या चोट होने पर व्यायाम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
हड्डियों को खींचकर या मरोड़कर सीधा करने वाली थेरेपी पर क्या बोले डॉक्टर?
पॉडकास्ट में हड्डियों को खींचने, मरोड़ने या तथाकथित “Bone Care Therapy” के जरिए रीढ़ या हड्डियों को सीधा करने के दावों पर भी चर्चा हुई।
डॉ. गाडेगोने ने लोगों को सलाह दी कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी किसी भी समस्या में बिना उचित चिकित्सकीय जांच के ऐसी प्रक्रिया नहीं करवानी चाहिए। हर कमर या गर्दन दर्द का कारण अलग हो सकता है और उपचार भी उसी के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
यदि कमर या गर्दन का दर्द लगातार बना हुआ है, दर्द बार-बार हो रहा है, हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट है, कमजोरी महसूस होती है अथवा दर्द सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
विशेष रूप से अचानक बढ़ती कमजोरी या पेशाब-मल पर नियंत्रण जैसी गंभीर समस्याएं दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।
जीवनभर हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर की 5 महत्वपूर्ण बातें
डॉ. पीयूष गाडेगोने की बातचीत से हड्डियों और रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए पांच प्रमुख संदेश सामने आते हैं—
1. नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
शरीर को लंबे समय तक निष्क्रिय न रखें।
2. संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
कैल्शियम, विटामिन-D और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्तता पर ध्यान दें।
3. सही पोस्चर अपनाएं।
मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय गर्दन और कमर की स्थिति का ध्यान रखें।
4. वजन को नियंत्रित रखें।
अधिक वजन से घुटनों और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
5. लगातार दर्द को नजरअंदाज न करें।
दर्द बार-बार हो रहा है या उसके साथ सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी है तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।
विशेषज्ञ परिचय
डॉ. पीयूष ड. गाडेगोने
एमबीबीएस, एमएस ऑर्थोपेडिक्स, डीएनबी ऑर्थोपेडिक्स, एफएनबी स्पाइन सर्जरी
डॉ. गाडेगोने ने एमजीआईएमएस सेवाग्राम से एमबीबीएस, एलटीएमएमसी एवं सायन अस्पताल, मुंबई से एमएस ऑर्थोपेडिक्स तथा राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली से डीएनबी ऑर्थोपेडिक्स किया है। उन्होंने कोलकाता से एफएनबी स्पाइन सर्जरी की है।
इसके अलावा उन्होंने एओ स्पाइन फेलोशिप, एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया), एसआईसीओटी फेलोशिप, ज्यूरिख, एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में फेलोशिप, सियोल (दक्षिण कोरिया), स्पाइनल डिफॉर्मिटी में फेलोशिप, केइओ यूनिवर्सिटी, टोक्यो (जापान) तथा मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी में फेलोशिप, मेलबर्न और कंसाई यूनिवर्सिटी, ओसाका (जापान) जैसी उन्नत प्रशिक्षण फेलोशिप हासिल की हैं।
My City Podcast का यह विशेष एपिसोड नागरिकों को कमर दर्द, गर्दन दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बदलती जीवनशैली के बीच विशेषज्ञ की यह जानकारी लोगों को समय रहते सावधानी बरतने और आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सा सलाह लेने के लिए प्रेरित करती है।





