केंद्र और राज्य सरकार ने चीनी के भंडारण और बिक्री को लेकर नियमों को सख्त करते हुए अब इसकी ।जमीनी स्तर पर जांच शुरू करने का फैसला किया है। जिले में चीनी के बड़े स्टॉक, खरीद-बिक्री और भंडारण व्यवस्था पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। इस कार्रवाई से व्यापारियों और संबंधित कारोबारियों में खलबली मच गई है।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अधिक मात्रा में चीनी का स्टॉक रखने और उसकी जानकारी छिपाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जीवनावश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसी के चलते जिला स्तर पर जांच अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।
गोदामों में अचानक जांच
जिले के विभिन्न गोदामों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कारखानों में अचानक निरीक्षण किया जाएगा। जांच टीम मौके पर पहुंचकर चीनी के वास्तविक स्टॉक की प्रत्यक्ष मापणी, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, गेट पास तथा जीएसटी रिटर्न की जानकारी की जांच करेगी।
यदि रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान स्टॉक से संबंधित दस्तावेजों और रजिस्टरों को भी बारीकी से देखा जाएगा।
स्टॉक रखने की सीमा तय
निर्देशों के मुताबिक, 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी का स्टॉक नहीं रखा जा सकेगा। किसी भी समय किसी भी स्थान पर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का भंडारण करने पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई है।
इसके अलावा उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले बड़े औद्योगिक ग्राहकों को 15 दिनों से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। ये सभी निर्बंध 30 नवंबर 2026 तक लागू रहने की जानकारी दी गई है।
‘अन्नसाठा देखरेख पोर्टल’ पर दर्ज करनी होगी जानकारी
सरकार ने चीनी विक्रेताओं, वितरकों और बड़े ग्राहकों को ‘अन्नसाठा देखरेख पोर्टल’ पर तत्काल स्टॉक की ऑनलाइन नोंदणी करने के निर्देश दिए हैं। इस पोर्टल पर हर शुक्रवार स्टॉक की अद्यतन जानकारी दर्ज करनी होगी।
प्रशासन का कहना है कि इससे बाजार में उपलब्ध चीनी के वास्तविक स्टॉक की निगरानी करने में मदद मिलेगी और जमाखोरी तथा कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सकेगी।
विशेष जांच दल का गठन
इस अभियान के लिए जिले में विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह दल जिलाधिकारी की अध्यक्षता में काम करेगा। इसमें जिला उपनिबंधक (सहकारी संस्था), सहायक आयुक्त, वैधमापन विभाग के अधिकारी, पुलिस तथा संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे।
जांच दल द्वारा गोदामों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण कर स्टॉक की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
ईमानदार व्यापारियों को चिंता की जरूरत नहीं
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों को परेशान करने के लिए नहीं है। ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। सभी व्यापारियों से अपील की गई है कि वे ‘अन्नसाठा देखरेख पोर्टल’ पर नियमित रूप से स्टॉक की सही जानकारी दर्ज करें और अपने रिकॉर्ड अद्यतन रखें।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी पर नियंत्रण, बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





