Home Chandrapur My City चंद्रपुर में मनपा अध्ययन केंद्रों की बदहाल स्थिति, छात्रों के भविष्य से...

चंद्रपुर में मनपा अध्ययन केंद्रों की बदहाल स्थिति, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

चंद्रपुर: कहा जाता है कि शिक्षा शेरनी का दूध है। महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए समाज के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोलने का ऐतिहासिक कार्य किया। लेकिन आज महाराष्ट्र में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थी अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने तथा बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की कथित उदासीनता के कारण उनके भविष्य पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।

चंद्रपुर नगर निगम के अंतर्गत वर्तमान में कुल 5 अध्ययन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। पिछले महीने पूर्व महापौर संगीता अमृतकर ने नगर निगम आयुक्त से मुलाकात कर इन अध्ययन केंद्रों की स्थिति की जानकारी दी थी और आवश्यक सुविधाओं में सुधार करने की मांग की थी। इस दौरान आयुक्त की ओर से 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था।

हालांकि, आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद अध्ययन केंद्रों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने 28 अगस्त 2026 को नगर निगम के अध्ययन कक्ष का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अध्ययन कक्ष की स्थिति बेहद खराब पाए जाने का दावा किया गया। एनएसयूआई के अनुसार, पिछले करीब तीन महीनों से शौचालय का गंदा पानी अध्ययन कक्ष परिसर में फैल रहा है, जिसके चलते पूरे परिसर में दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। शौचालय की साफ-सफाई और स्वच्छता की स्थिति भी बेहद खराब होने का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा, विद्यार्थियों के लिए नए पाठ्यक्रम की आवश्यक किताबों की भी कमी बताई जा रही है। एनएसयूआई का कहना है कि यही स्थिति नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 5 विद्यालयों और प्राथमिक विद्यालयों में भी देखने को मिल रही है।

एनएसयूआई ने प्रशासन पर विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर अध्ययन केंद्रों और विद्यालयों की स्थिति में आवश्यक सुधार नहीं किया गया, तो संगठन की ओर से आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए बनाए गए अध्ययन केंद्रों में स्वच्छता, पर्याप्त सुविधाएं और पाठ्यक्रम से संबंधित किताबें उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में अब देखना होगा कि एनएसयूआई की चेतावनी के बाद नगर निगम प्रशासन इन समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी करता है।