चंद्रपुर | 7 अगस्त
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिचपल्ली स्थित बांबू रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (BRTC) में देश के पहले AICTE मान्यता प्राप्त ‘डिप्लोमा इन बैम्बू टेक्नोलॉजी’ पाठ्यक्रम की वर्ष 2026-27 की पहली बैच का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बांस आधारित उद्योगों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है। इसे देश के बैम्बू उद्योग के लिए प्रशिक्षित और तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
इस प्रथम बैच में महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और नागालैंड के विद्यार्थियों ने भी प्रवेश लिया है। AICTE से मान्यता प्राप्त इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में कुल 60 सीटें उपलब्ध हैं।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं चंद्रपुर के मुख्य वन संरक्षक आर. एम. रामानुजम ने की। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं BRTC के प्रबंध निदेशक हृषिकेश रंजन, उप वन संरक्षक योगेश वाघाये तथा विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में आर. एम. रामानुजम ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाकर अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया। वहीं अन्य अधिकारियों ने बांस उद्योग की संभावनाओं, सतत विकास और ब्राजील द्वारा इथेनॉल उत्पादन के उदाहरण के माध्यम से इस क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला।
अधिकारियों ने बताया कि इस डिप्लोमा को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को नियमानुसार लेटरल एंट्री के माध्यम से बी.ई./बी.टेक. के द्वितीय वर्ष में सीधे प्रवेश का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में BRTC के निदेशक एम. एन. खैरनार ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा और महत्व पर जानकारी दी, जबकि वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश शेंडे ने आभार व्यक्त किया। समारोह में शोधकर्ता, बैम्बू उद्यमी, उद्योग प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।




