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लोक सेवा गारंटी कानून का उल्लंघन: चंद्रपुर मनपा के जन्म-मृत्यु विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप

“पहला जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मुफ्त है, फिर भी नागरिकों से की जा रही अवैध वसूली” – जोन सभापति वैशाली चंदनखेड़े

चंद्रपुर। चंद्रपुर महानगरपालिका (मनपा) के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में लोक सेवा गारंटी कानून का खुलेआम उल्लंघन किए जाने तथा नागरिकों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाने का गंभीर आरोप जोन क्रमांक-2 की सभापति वैशाली प्रकाश चंदनखेड़े ने लगाया है।

वैशाली चंदनखेड़े ने कहा कि शासन के नियमों के अनुसार जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क होता है। इसके साथ ही पहला जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र भी नागरिकों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। इसके बाद जारी होने वाली प्रत्येक प्रति के लिए मात्र ₹5 शुल्क निर्धारित है। वहीं, महाराष्ट्र लोक सेवा गारंटी अधिनियम-2015 के अनुसार आवेदन मिलने के तीन दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। नागरिकों से पहले प्रमाणपत्र के लिए भी ₹300 से ₹500 तक की मांग की जा रही है। मुख्य कार्यालय के कर्मचारी लोगों को यह कहकर जोन क्रमांक-3 भेज रहे हैं कि “यहां काम नहीं होगा, वहां जाकर मेरा नाम बताइए, काम हो जाएगा।”

उन्होंने कहा कि तीन दिन में मिलने वाला प्रमाणपत्र 8 से 15 दिनों की देरी से दिया जा रहा है और जब तक पैसे नहीं दिए जाते, फाइल लंबित रखी जाती है। इसके अलावा पंजीयक और वरिष्ठ अधिकारी समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते, जिससे नागरिकों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। जानकारी मांगने पर कर्मचारियों द्वारा संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल और अभद्र व्यवहार किया जाता है।

वैशाली चंदनखेड़े ने कहा कि दोपहर के भोजन अवकाश के बाद भी कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं लौटते, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इससे महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम और लोक सेवा गारंटी कानून का उद्देश्य ही विफल होता दिखाई दे रहा है।

आयुक्त से की गई प्रमुख मांगें

उन्होंने मनपा आयुक्त से चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

जन्म-मृत्यु विभाग में तत्काल “पहला प्रमाणपत्र निःशुल्क है” का सूचना बोर्ड लगाया जाए।

सभी लेन-देन केवल रसीद के साथ हों तथा विभाग में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

तीन दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी नहीं करने वाले अधिकारियों पर लोक सेवा गारंटी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

नागरिकों को विशेष जोन में भेजकर कथित वसूली करने वाले कर्मचारियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

वैशाली चंदनखेड़े ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में बिना रसीद के पैसे न दें। यदि कोई कर्मचारी पैसे की मांग करता है तो इसकी जानकारी तत्काल उन्हें दें। उन्होंने कहा कि वे नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी हैं। यदि सात दिनों के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सभी नगरसेवकों के साथ आंदोलन किया जाएगा।

शासन के नियम

जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क।
पहला जन्म/मृत्यु प्रमाणपत्र निःशुल्क।
आवेदन के तीन दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य।