चंद्रपुर। आदिवासी समाज की विभिन्न लंबित और ज्वलंत समस्याओं को लेकर आदिवासी टाइगर सेना ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। प्रशासन की कथित उदासीनता के विरोध में संगठन की ओर से 17 अगस्त से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन शुरू किया गया है। संगठन के विदर्भ अध्यक्ष संतोष कुळमेथे ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 10 दिनों में प्रशासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में संतोष कुळमेथे ने प्रशासन पर आदिवासी समाज की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने गडचिरोली जिले के धानोरा स्थित जलपताई अनुदानित आश्रमशाला में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग की। साथ ही आश्रमशाला के विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग भी की।
उन्होंने राज्य की सभी अनुदानित आदिवासी एवं समाजकल्याण आश्रमशालाओं की स्वतंत्र त्रयस्थ संस्था के माध्यम से जांच कराने तथा आवश्यक सुविधाओं के अभाव वाली आश्रमशालाओं की मान्यता रद्द करने की मांग रखी। इसके अलावा वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान आश्रमशालाओं में हुई 285 मौतों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई।
आदिवासी टाइगर सेना ने शासकीय आदिवासी छात्रावासों के विद्यार्थियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले 14 अगस्त 2026 के शासन निर्णय को तत्काल रद्द करने, शबरी आवास योजना (शहरी) के नियमों को रमाई आवास योजना की तर्ज पर सरल करने तथा परियोजना स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की निविदाओं में 80 प्रतिशत काम आदिवासी संस्थाओं और बेरोजगार युवाओं को देने के लिए स्वतंत्र शासन निर्णय जारी करने की मांग भी की है।
कुळमेथे ने कहा कि यदि प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए प्रशासन जिम्मेदार रहेगा।
पत्रकार वार्ता में सुमित्रा आलाम, सुनीता चांदेकर, अभिलाष परचाके, कालीदास नगराळे सहित आदिवासी टाइगर सेना के पदाधिकारी उपस्थित थे।





