चंद्रपुर, 20 अगस्त। बालकों से संबंधित मामलों को संभालते समय किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह न रखते हुए प्रत्येक मामले को समान संवेदनशीलता के साथ देखना आवश्यक है। विशेषकर पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में पुलिस, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल संरक्षण से जुड़ी सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए, ताकि बालकों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। यह अपील जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी ने की।
जिलाधिकारी वसुमना पंत के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण कक्ष की ओर से 19 अगस्त को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मंथन सभागृह में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय, बाल कल्याण समिति तथा बाल न्याय मंडल की समन्वय बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी ने कहा कि पॉक्सो मामलों में विभिन्न विभागों के बीच उचित समन्वय बच्चे को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित अपर जिलाधिकारी डॉ. नितीन व्यवहारे ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करते समय विभिन्न एजेंसियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आपसी समन्वय, संवाद और उचित कानूनी मार्गदर्शन के लिए इस तरह की कार्यशालाएं महत्वपूर्ण साबित होती हैं।
इस अवसर पर शासकीय मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबले सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे।
अधिवक्ता अनिरुद्ध पाटील ने पॉक्सो कानून, बाल न्याय अधिनियम, बाल विवाह प्रतिबंध, विभिन्न मामलों के अनुभव तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से मार्गदर्शन किया। उन्होंने बालकों के क्षेत्र में काम करते समय संवेदनशीलता के महत्व के साथ ही ‘बाल मित्रवत दृष्टिकोण’ की आवश्यकता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बालकों से जुड़े मामलों में सभी विभाग यदि मिलकर काम करें तो इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चे के हित और न्याय प्रक्रिया दोनों पर पड़ता है।
कार्यशाला के अंत में विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों का विषय विशेषज्ञों एवं उपस्थित अधिकारियों ने समाधान किया।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मीनाक्षी भस्मे ने प्रस्तावना में बताया कि पॉक्सो कानून, बाल न्याय अधिनियम, बाल विवाह तथा बालकों के साथ काम करते समय आने वाली चुनौतियों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कल्पना राजुरकर ने किया, जबकि अभिषेक मोहुर्ले ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के दोषसिद्धि कक्ष के एपीआई विनोद रहांगडाले, महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिश चव्हाण, अजय साखरकर सहित पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाल कल्याण समिति, बाल न्याय मंडल, जिला बाल संरक्षण कक्ष, चाइल्ड हेल्पलाइन और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय ने सहयोग किया।






