20 अगस्त 2026: चंद्रपुर जिले के जीवती क्षेत्र से जुड़े एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 19 अगस्त 2026 को संबंधित थानेदार को नोटिस जारी करते हुए 16 सितंबर 2026 तक वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला विनोद खोबरागड़े की ओर से दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संग्राम सिरपुरकर ने पक्ष रखा, जबकि प्रतिवादी क्रमांक 1 की ओर से सरकारी अधिवक्ता एडवोकेट दामले ने दलीलें पेश कीं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, 3 फरवरी 2015 को तलाठी विनोद खोबरागड़े, मंडल अधिकारी किरण घाटे सहित चार लोगों के खिलाफ कथित रूप से झूठा और मनगढ़ंत मामला दर्ज किया गया था। करीब दस वर्षों तक चली जांच के बाद संबंधित अपराध में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद 20 जनवरी 2024 को तत्कालीन थानेदार कंचन पांडे ने राजुरा न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट क्रमांक 5/2024 प्रस्तुत की।
याचिकाकर्ता का दावा है कि 20 सितंबर 2024 को तत्कालीन जिला कलेक्टर, चंद्रपुर ने कथित साजिश और मिलीभगत का उल्लेख करते हुए पुलिस अधीक्षक, चंद्रपुर को वर्ष 2021 के संदर्भ सहित कार्रवाई के संबंध में पत्र भेजा था। इसके बाद 27 नवंबर 2024 को पुलिस अधीक्षक, चंद्रपुर ने संबंधित थानेदार कंचन पांडे को विनोद खोबरागड़े एवं अन्य के खिलाफ दोबारा आरोपपत्र दाखिल करने के संबंध में पत्र लिखा।
इसके बाद राजुरा न्यायालय में मामला क्रमांक 7/2025 के तहत आरोपपत्र दाखिल किए जाने का दावा याचिका में किया गया है। विनोद खोबरागड़े का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के चलते उन्हें और उनके परिवार को मानसिक, शारीरिक तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
RTI से सामने आई भूमि परिवर्तन मामलों की जानकारी
याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, जिला कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच भूमि परिवर्तन के 22,331 मामले लंबित थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसी अवधि में चंद्रपुर जिले के अन्य तलाठियों के खिलाफ भूमि परिवर्तन मामलों को लेकर जिस प्रकार की कार्रवाई की गई, वैसी कार्रवाई उनके खिलाफ किए जाने का कोई समान आधार नहीं था।
इन दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विनोद खोबरागड़े ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में याचिका दायर की। मामले में क्रमांक 1977/2026 के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों पर सुनवाई करते हुए 19 अगस्त 2026 को न्यायालय ने संबंधित थानेदार, जीवती को नोटिस जारी किया और 16 सितंबर 2026 तक मामले पर वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
बल्लारपुर का 7 जुलाई 2025 का मामला भी हाईकोर्ट में
इसी बीच विनोद खोबरागड़े ने बल्लारपुर से जुड़े एक अन्य मामले में भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, 7 जुलाई 2025 को बल्लारपुर के तत्कालीन थानेदार बिपिन इंगले की ओर से उनके और उनके मामा बाबा उरकुडा रत्नपारखी के खिलाफ कथित रूप से झूठा एवं मनगढ़ंत अपराध दर्ज किया गया और बाद में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार, घटना के दिन तहसील कार्यालय और उप-मंडल कार्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। जब सीसीटीवी फुटेज मांगा गया तो जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध कराने की बात कही गई। हालांकि, आरोप है कि जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी सीसीटीवी फुटेज न तो विनोद खोबरागड़े को उपलब्ध कराया गया और न ही उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
खोबरागड़े का दावा है कि 7 जुलाई 2025 को वे और उनके मामा बाबा उरकुडा रत्नपारखी बल्लारपुर तहसील अथवा चंद्रपुर जिले में मौजूद ही नहीं थे। इसके बावजूद दोनों को मामले में आरोपी बनाए जाने से उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस मामले को खारिज करने की मांग को लेकर विनोद खोबरागड़े और बाबा रत्नपारखी ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में आपराधिक याचिका (APL) दायर की है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस मामले में भी न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन बल्लारपुर थानेदार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत
याचिकाकर्ता ने बताया कि राजस्व अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की गई है।
पूरे प्रकरण में अब हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के समक्ष 16 सितंबर 2026 को संबंधित थानेदार की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।





