गोंडपिंपरी और पोंभुर्णा में दिए जा रहे कुछ खाद्य पदार्थ मानकों पर खरे नहीं उतरे, कुछ सेवन के लिए असुरक्षित; विजय वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा

पत्रकारों के सामने उजागर करते हुए आमदार विजय वडेट्टीवार
चंद्रपुर, 9 अगस्त। चंद्रपुर जिले की आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले गर्म और ताजे भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गोंडपिंपरी और पोंभुर्णा तालुका में एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना (ICDS) के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की प्रयोगशाला जांच में कुछ खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात सामने आई है। वहीं, कुछ खाद्य पदार्थ सेवन के लिए असुरक्षित पाए गए हैं।
इस गंभीर मामले को लेकर कांग्रेस के विधानमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने पत्रकार परिषद आयोजित कर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नागपुर की प्रयोगशाला में हुई खाद्य पदार्थों की जांच
महिला एवं बाल विकास विभाग के नागपुर विभागीय उपायुक्त कार्यालय ने 18 जून 2026 को एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना के आयुक्त को पत्र भेजा था। इस पत्र के साथ नागपुर स्थित क्षेत्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला द्वारा किए गए आहार परीक्षण की रिपोर्ट भी संलग्न की गई थी।
रिपोर्ट में चंद्रपुर जिले के गोंडपिंपरी और पोंभुर्णा क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराए जा रहे कुछ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
‘बच्चों की थाली में घटिया भोजन कैसे पहुंचा?’
वडेट्टीवार ने सवाल उठाते हुए कहा कि आंगनवाड़ी के मासूम बच्चों को दिया जाने वाला भोजन केवल सरकारी योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके पोषण, स्वास्थ्य और शारीरिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में यदि भोजन की गुणवत्ता में गंभीर खामियां पाई जाती हैं तो यह सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का गंभीर मामला है।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से सवाल किया कि आंगनवाड़ी के मासूम बच्चों की थाली में घटिया अथवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन आखिर कैसे पहुंचा और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
पूरी भोजन आपूर्ति व्यवस्था की हो जांच
आंगनवाड़ी के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से बड़ी मात्रा में निधि खर्च की जाती है। इसके बावजूद यदि प्रयोगशाला जांच में ही कुछ खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते और कुछ पदार्थ सेवन के लिए असुरक्षित पाए जाते हैं, तो पूरी भोजन आपूर्ति व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है, ऐसा वडेट्टीवार ने कहा।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि आंगनवाड़ी के माध्यम से दिया जाने वाला भोजन ही गुणवत्ता की कसौटी पर विफल हो रहा है, तो सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों तक कैसे पहुंचेगा?
दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई, आंदोलन की चेतावनी
वडेट्टीवार ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह विषय राजनीतिक नहीं, बल्कि उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए जांच रिपोर्ट में सामने आई प्रत्येक त्रुटि की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
सिर्फ दो तालुकों तक सीमित न रहे जांच
वडेट्टीवार ने मांग की कि कार्रवाई केवल गोंडपिंपरी और पोंभुर्णा तक सीमित न रखते हुए पूरे चंद्रपुर जिले के साथ-साथ राज्य के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले भोजन की व्यापक गुणवत्ता जांच की जाए।
उन्होंने आहार के नमूने नियमित रूप से प्रयोगशालाओं में भेजकर उनकी जांच कराने, दोषी आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को संरक्षण न देने की मांग की।




