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चंद्रपुर नगर निगम की आम सभा में भारी हंगामा, सचिव का माइक्रोफोन तोड़ा; 45 पार्षदों ने किया बहिष्कार

चंद्रपुर | 5 अगस्त 2026

चंद्रपुर नगर निगम की आम सभा बुधवार को भारी राजनीतिक हंगामे की भेंट चढ़ गई। अनुमोदित सदस्यों की नियुक्ति और आम सभा की कार्यवाही को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के 45 पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। विरोध के दौरान नगर निगम सचिव का माइक्रोफोन तोड़ दिया गया और सदन में जमकर नारेबाजी हुई। लगातार बढ़ते हंगामे के बीच महापौर संगीता खांडेकर ने बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम आयुक्त ने आम सभा के एजेंडे में अनुमोदित सदस्यों की नियुक्ति का विषय शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। विपक्ष का आरोप है कि महापौर ने नियमों के अनुरूप इस विषय पर चर्चा नहीं होने दी और सभा की कार्यवाही मनमाने ढंग से संचालित की। इसी के विरोध में भाजपा, शिवसेना, शिवसेना (उद्धव गुट) तथा कांग्रेस महानगर अघाड़ी सहित विभिन्न दलों के पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया।

कोरम पूरा करने की कोशिश, फिर बढ़ा विवाद

नगर निगम की आम सभा के लिए 22 पार्षदों की उपस्थिति आवश्यक थी। शुरुआत में महापौर सहित केवल 7 भाजपा पार्षद मौजूद थे। बाद में कुछ अन्य पार्षदों के पहुंचने से कोरम पूरा होने पर कार्यवाही शुरू की गई। इसी दौरान कांग्रेस और महानगर अघाड़ी के पार्षद भी सदन में पहुंचे और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सचिव का माइक्रोफोन तोड़ा, सदन में नारेबाजी

विरोध के दौरान कांग्रेस समूह के नेता सुरेंद्र अदाबले और महानगर अघाड़ी के नेता पप्पू देशमुख अपने समर्थक पार्षदों के साथ सदन में पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान सचिव संतोष गर्गेलवार के सामने रखी नगर निगम अधिनियम की पुस्तक उठाकर आयुक्त के सामने रखी गई और नियमों का पालन करने की मांग की गई। इसी बीच सचिव का माइक्रोफोन भी तोड़ दिया गया, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

हंगामे के बीच भाजपा, शिवसेना (उद्धव गुट) और अन्य दलों के जनप्रतिनिधियों ने कार्यवाही रोकने की मांग की। लगातार बढ़ते विरोध और अव्यवस्था को देखते हुए महापौर संगीता खांडेकर ने नगर निगम की आम सभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

इस घटनाक्रम के बाद चंद्रपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नगर निगम की कार्यप्रणाली और अनुमोदित सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।