
रहमत नगर रोड चंद्रपुर
रामनगर थाने के PSI सुरेंद्र उपरे व EOW कर रहे हैं गहन जांच
रामनगर पुलिस थाने में अपराध पंजीबद्ध
रेलवे में TC की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 15 बेरोजगार युवाओं से करीब 1 करोड़ 31 लाख रुपये की ठगी किए जाने के मामले में आखिरकार आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को फरियादी कौस्तुभ विलास आदे की शिकायत पर दोपहर 2:55 बजे चंद्रपुर के रहमतनगर निवासी मुजिबुर लतीफ कुरेशी, सिस्टर कॉलोनी निवासी रविंद्र संभाजी वाघमारे तथा नागपुर के गोधनी निवासी सुरेंद्र रामकृष्ण तेलंग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420, 406, 465, 464, 468, 471, 472, 473 एवं 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। मामले की जांच रामनगर थाने के PSI सुरेंद्र उपरे कर रहे हैं, जबकि आर्थिक अपराध शाखा (EOW), चंद्रपुर भी समानांतर रूप से विस्तृत जांच में जुटी है।
⚠ घर-खेत गिरवी रखकर जुटाई रकम, बदले में मिले फर्जी दस्तावेज और धमकियां
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं को रेलवे में टिकट कलेक्टर (टीसी) पद पर नियुक्ति का लालच दिया। प्रत्येक युवक से 10 से 15 लाख रुपये नकद वसूले गए। कई परिवारों ने अपने घर और खेत गिरवी रखे, कर्ज लिया और रिश्तेदारों से उधार लेकर रकम आरोपियों को सौंपी।
रकम लेने के बाद युवाओं को फर्जी नियुक्ति आदेश, मेडिकल प्रमाणपत्र, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट, पुलिस वेरिफिकेशन पत्र और पहचान पत्र तक दिए गए। जब युवाओं ने वास्तविक जॉइनिंग की जानकारी मांगी या पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। बाद में रकम लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया और पुलिस में जाने पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी सामने आए हैं।
कैसे बुना गया भरोसे का जाल
बताया गया है कि वर्ष 2014 में शिकायतकर्ताओं की मुलाकात शबनम शेख नामक महिला से हुई थी। उसने दावा किया कि चंद्रपुर का कुरेशी रेलवे में सीधी भर्ती करवाता है और उसके उच्च अधिकारियों से गहरे संबंध हैं। “काम की 100 प्रतिशत गारंटी” का भरोसा देकर युवाओं को कुरेशी से मिलवाया गया। इसी विश्वास के आधार पर बड़ी रकम सौंप दी गई।
नागपुर से कोलकाता तक ‘ट्रेनिंग’ का नाटक
युवाओं को पहले चंद्रपुर बुलाया गया, वहां से बस द्वारा नागपुर और फिर विमान से कोलकाता ले जाया गया। इस दौरान तेलंग और वाघमारे भी साथ थे। कोलकाता में युवाओं को होटल में ठहराया गया और कथित “टीसी ट्रेनिंग स्कूल” में ले जाकर नकली प्रशिक्षण का दिखावा किया गया। वहां से तथाकथित ट्रेनिंग सर्टिफिकेट और फर्जी पुलिस सत्यापन पत्र सौंपे गए।
करीब डेढ़ वर्ष तक उन्हें आश्वासन दिया जाता रहा। धीरे-धीरे आरोपियों का संपर्क कम होने लगा, तब युवाओं को ठगी का एहसास हुआ। परिवार की इज्जत और भारी कर्ज के दबाव के कारण लंबे समय तक पीड़ित चुप रहे।
जेल, बाउंस चेक और झूठे वादों का सिलसिला
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि मुख्य आरोपी पहले नांदेड जेल में बंद रह चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने कई बार अपने कार्यालय बदले और “कुछ महीने इंतजार करो” कहकर समय टालता रहा। दबाव बढ़ने पर खाली खाते के चेक दिए गए, जो बाद में बाउंस हो गए। रकम लौटाने के नाम पर प्लॉट बिकने का हवाला देकर 7–8 वर्षों तक गुमराह करने का आरोप है।
दस्तावेजी सबूतों के साथ शिकायत
आर्थिक अपराध शाखा को सौंपे गए दस्तावेजों में फर्जी रेलवे नियुक्ति आदेश, नकली ट्रेनिंग प्रमाणपत्र, पुलिस वेरिफिकेशन पत्र और बाउंस हुए चेक शामिल हैं। पुलिस अब इन दस्तावेजों की तकनीकी जांच कर रही है।
ठगी के शिकार युवाओं की सूची
इस मामले में चंद्रपुर, भंडारा, गडचिरोली, यवतमाल सहित विभिन्न क्षेत्रों के 15 युवक प्रभावित हुए हैं, जिनमें पवन बाबाराव वाघमारे, कौस्तुभ विलास आदे, इकराम शेख, हरीश अकुला, गोपाल मुंडले, विपिन गणवीर, दिनेश अंड्रस्कर, अशोक सातपुते, रविंद्र वांढरे, शेख सय्यद, नागराज अंबाला, अनुप शेंडे, हरिहर मेश्राम, गंगाधर पेंडयाला और इमरान पठाण शामिल हैं।
सिर्फ ठगी नहीं, व्यवस्था पर भी सवाल
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं की मजबूरी और सरकारी नौकरियों की कमी का भी गंभीर संकेत है। नकली नियुक्ति पत्रों का तैयार होना और वर्षों तक आरोपियों का खुलेआम सक्रिय रहना प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्न खड़े करता है।
पीड़ितों की मांग
पीड़ितों ने मुख्य आरोपी मुजिबुर लतीफ कुरेशी सहित सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, ठगी की पूरी राशि की वसूली और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य दलालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी युवा सरकारी नौकरी के नाम पर अपनी जमा-पूंजी और सपने न गंवाए।
यह प्रकरण केवल एक एफआईआर नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं की टूटी उम्मीदों की कहानी है, जिसकी निष्पक्ष और कठोर जांच अब कानून व्यवस्था के लिए परीक्षा बन गई है।

