घुग्घुसमें दिखी ऐतिहासिक जीत। कांग्रेस की दीप्ती सोनटक्के बनीं नगराध्यक्ष – भाजपा को 346 मतों से करारी शिकस्त

घुग्घुस (चंद्रपुर):

11 प्रभागों में कांग्रेस का दबदबा, भाजपा को झटका

नगरपरिषद के 11 प्रभागों की 22 सीटों के परिणामों में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा।

कांग्रेसः 11 सीटें

भाजपा: 7 सीटें

एनसीपी (अजित पवार गुट): 2 सीटें

निर्दलीयः 2 सीटें

यह परिणाम इसलिए भी अहम हैं क्योंकि घुग्घुस क्षेत्र में भाजपा का विधायक होने के बावजूद नगरपरिषद स्तर पर कांग्रेस ने स्पष्ट बढ़त बनाकर राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया है।

प्रभागवार परिणाम (संक्षेप में)

खंड 1:

एनसीपी (अजित पवार गुट): रविश सिंह, शुभांगी सारसद

धारा 2:

कांग्रेसः सूरज कनूर

स्वतंत्र: माला मेश्राम

धारा 3:

कांग्रेस: राजू रेड्डी, आशा पनघाटे

धारा 4:

भाजपा: विवेक बोधे, चैताली सातपुते

धारा 5:

कांग्रेसः रोशन पचारे, अर्चना सरोकर

धारा 6:

कांग्रेस: श्रुतिका कलवाल, दिलीप पीतलवार

धारा 7:

भाजपा: गणेश पिपलशेंडे, मधु संजय तिवारी

धारा 8:

कांग्रेसः नुरूल सिद्दीकी, सुनिता पेंदोर

धारा 9:

भाजपा: मीना मोरपका, वैशाली धवास

धारा 10:

स्वतंत्र: पंकज धोटे

कांग्रेसः वैशाली चिकनकर

धारा 11:

बीजेपी: आशीष मासिरकर

कांग्रेस: पल्लवी घुले

करीब पाँच वर्षों से बहुप्रतीक्षित घुग्घुस नगरपरिषद

चुनाव का परिणाम आखिरकार घोषित हो गया और इस चुनावी रण में कांग्रेस ने बाज़ी मारते हुए स्पष्ट राजनीतिक बढ़त हासिल कर ली। नगराध्यक्ष पद के लिए हुए सीधे मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार दीप्ती सोनटक्के ने 7713 मत प्राप्त कर भाजपा की शारदा दुर्गम (7452 मत) को 346 मतों के अंतर से पराजित किया। यह जीत न केवल संख्यात्मक बढ़त है, बल्कि स्थानीय राजनीति में कांग्रेस की मजबूत वापसी का संकेत भी मानी जा रही है।

स्थानीय मुद्दों पर फोकस: कांग्रेस ने पानी, सड़क, सफाई प्रदूषण और रोजगार जैसे नगरस्तरीय मुद्दों को केंद्र में रखा।

बागियों और निर्दलीयों का असर: कई प्रभागों में मुकाबला त्रिकोणीय

रहा, जिससे भाजपा को नुकसान हुआ।

शहरी मतदाता का संदेशः परिणाम बताते हैं कि शहरी मतदाता विकास और स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।

भविष्य की राजनीति पर असरः यह जीत आने वाले समय में जिला व विधानसभा राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।

घुग्घुस नगरपरिषद चुनाव परिणाम ने साफ कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में कांग्रेस ने निर्णायक वापसी की है। नगराध्यक्ष पद पर दीप्ती सोनटक्के की जीत और परिषद में कांग्रेस की संख्या बल वाली स्थिति से अगले पाँच वर्षों के लिए नगर की राजनीति की दिशा तय होती दिख रही है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का संकेत बनकर उभरा है।

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