वरोरा। वेकोलि की एकोना कोयला खदान में रोजाना होने वाली तेज ब्लास्टिंग को लेकर वरोरा शहर के नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। खदान में होने वाले विस्फोटों के कारण आसपास के इलाकों में तेज कंपन महसूस होने और इससे घरों की दीवारों में दरारें पड़ने, प्लास्टर गिरने तथा खिड़कियों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होने के साथ ही जान-माल का नुकसान भी हो सकता है।
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद नागरिकों ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए खासदार प्रतिभा धानोरकर से मुलाकात की और ब्लास्टिंग की तीव्रता तथा उससे होने वाले कंपन की समस्या उनके सामने रखी। नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीरता से लेते हुए धानोरकर ने वेकोलि प्रशासन के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इसके बाद ब्लास्टिंग की वास्तविक तीव्रता की तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया गया।
14 दिनों के भीतर होगी तकनीकी जांच
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, वेकोलि के अधिकारी आगामी 14 दिनों के भीतर वरोरा शहर के प्रभावित वार्डों में विशेष ‘पैरामीटर्स’ यानी मापक यंत्र लगाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले कंपन और उसकी तीव्रता को तकनीकी रूप से मापा जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि खदान में होने वाली ब्लास्टिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
बैठक में वेकोलि प्रशासन की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और ब्लास्टिंग के कारण नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
6 किलोमीटर दूर तक कंपन पहुंचने पर उठे सवाल
बैठक के दौरान ब्लास्टिंग के निर्धारित मानकों को लेकर भी सवाल उठाए गए। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की ओर से आशंका जताई गई कि यदि ब्लास्टिंग निर्धारित सीमा में हो रही है, तो इसके कंपन का असर लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित वरोरा शहर तक कैसे पहुंच रहा है। इसी तकनीकी पहलू की गहराई से जांच किए जाने की मांग की गई है।
ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे विस्फोटकों की मात्रा को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में नियमानुसार 15 टन तक ब्लास्टिंग की अनुमति का उल्लेख करते हुए आशंका जताई गई है कि कहीं निर्धारित सीमा से अधिक विस्फोटक तो इस्तेमाल नहीं किए जा रहे। हालांकि, वास्तविक स्थिति का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
प्रभावित मकानों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
इस मामले में केवल ब्लास्टिंग की तीव्रता मापने तक सीमित न रहते हुए प्रभावित मकानों की स्थिति की भी जांच करने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी के माध्यम से जांच समिति गठित कर प्रभावित घरों का ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ कराने की बात कही गई है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि मकानों में आई दरारों और अन्य नुकसान का संबंध ब्लास्टिंग से है या नहीं।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक
समस्या के समाधान के लिए वरोरा के उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में तत्काल संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में खासदार प्रतिभा धानोरकर, आमदार करण देवतळे, नगराध्यक्ष अर्चना ठाकरे, उपविभागीय अधिकारी संदीप भस्के, तहसीलदार योगेश कोटकर, वेकोलि के क्षेत्रीय प्रबंधक राकेश प्रसाद, मुख्याधिकारी सिद्धार्थ मेश्राम सहित संबंधित अधिकारी और प्रभावित क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने वेकोलि प्रशासन से स्पष्ट रूप से कहा कि नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। वहीं, प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की प्रत्यक्ष पाहणी, तकनीकी मापन और नियमों के पालन का भरोसा दिया गया।
नागरिकों को अब जांच रिपोर्ट का इंतजार
लगातार हो रही तेज ब्लास्टिंग से परेशान नागरिकों के लिए अब अगले 14 दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष मापक यंत्रों से होने वाली जांच में ब्लास्टिंग की वास्तविक तीव्रता और कंपन का स्तर सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि समस्या की वास्तविक वजह क्या है और इसके लिए किस स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है।
फिलहाल वेकोलि प्रशासन ने तकनीकी जांच और प्रभावित मकानों के निरीक्षण का आश्वासन दिया है। अब नागरिकों की नजर इस बात पर है कि तय समय सीमा में जांच पूरी होती है या नहीं और जांच के बाद उनकी सुरक्षा तथा मकानों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।





